बेपरवाह निभा लीजिये…

ईश्वर का वरदान है ज़िन्दगी…कभी कभी इसके अनुभव बहुत कड़वे होते है लेकिन हमें हर बात में कुछ न कुछ अच्छाई ढूंढने का प्रयास करना चाहिए। ज़िन्दगी बेशक़ीमती है और हमे दोबारा नहीं मिलेगी।

क्या रूठना इससे, बेपरवाह निभा लीजिये
मिलेगी न ज़िन्दगी दोबारा
ज़िन्दगी को मना लीजिये

माना जीवन सरल नहीं है
अनुभव बहुत हैं कड़वे इसके
लेकिन फिर भी गरल नहीं है
घूँट इसके भी कुछ लगा लीजिये
मिलेगी न ज़िन्दगी दोबारा
ज़िन्दगी को मना लीजिये

कब तक है ये पता नहीं
झुका के तू अहम अपना
रुठों को अपने मना लीजिये
याद कर अच्छाइयाँ उनकी
बातें बुरी जो भुला लीजिये
मिलेगी न ज़िन्दगी दोबारा
ज़िन्दगी को मना लीजिये

मानों तो सज़ा है ज़िन्दगी
मानों तो ख़ुदा की नियामत है
मानों तो तपता रेगिस्तान
मानों तो छाँव ठण्डी सुखद है
क्या हुआ जो ग़म दिए इस ज़िंदगी ने
मुस्करा गले अपने लगा लीजिये
मिलेगी न ज़िन्दगी दोबारा
ज़िन्दगी को मना लीजिये

-तूलिका श्रीवास्तव “मनु”