तन्हाई

जब कोई हमें समझ नही पाता, कैसा होता है ना ये अकेलापन………

अपने दिल का हाल किसको और करें कैसे बयाँ
खुशनुमा सी भीड़ में भी, पाता है खुद को तन्हा
सोचा न था दर्द और ग़म का, यूँ चलेगा सिलसिला
न कोई होगा साथ मेरे, न कोई बनेगा मेरा हमनवाज़

-तूलिका श्रीवास्तव “मनु”