हैरान…

उम्मीदे…जाने अनजाने हम किसी न किसी से, किसी न किसी तरह की उम्मीद लगा ही लेते हैं, जो बाद में हमारे दुःख का कारण बन जाती है

उम्मीदों का दामन, न थाम दिल मेरे
मायूसी से बेहतर है, हैरान होना

– तुलिका श्रीवास्तव “मनु”